व्रज की पवित्र भूमि का जीवंत विश्वकोश

व्रजपीडिया

«हे चरणो, वृन्दावन चलो! हे नेत्रो, इस सौन्दर्य को निहारो! हे जिह्वे, इसकी महिमा गाओ! हे देह, इसी धूल में प्रेम-विह्वल होकर लोटो!»

— वृन्दावन-महिमामृत, 17.7
Шри Рупа Сева Кунджа

«हमें व्रज से प्रेम है और हम इस पवित्र भूमि तथा इसके निवासियों की सेवा का प्रयास करते हैं। व्रजपीडिया श्री श्री राधा-गोविन्द की लीला-स्थली की महिमा गाने का हमारा एक और विनम्र प्रयास है।»

श्री रूप सेवा कुंज आश्रम के भक्तगण

लेख72

अमलतास
वनस्पतियाँ
अमलतास
माधवी
वनस्पतियाँ
माधवी
कर्णिकार
वनस्पतियाँ
कर्णिकार
सेमल
वनस्पतियाँ
सेमल
वज्रदन्ती
वनस्पतियाँ
वज्रदन्ती

«मैं समस्त देवों का आत्मा हूँ, और इस वृन्दावन-वन को कभी नहीं छोड़ता। यहीं मैं युग-युग में प्रकट होता और अन्तर्धान होता हूँ»

— बृहद्-गौतमीय-तन्त्र
पीलू
वनस्पतियाँ
पीलू
कुश
वनस्पतियाँ
कुश
चाँदनी
वनस्पतियाँ
चाँदनी